इस्लाम में हर इबादत की शुरुआत अल्लाह के नाम से करना सिखाया गया है। नमाज़ जैसी बड़ी इबादत से पहले जब हम वजू करते हैं, तो उस वजू की भी एक खूबसूरत शुरुआत होती है Wazu Karne Ki Dua से।
वजू करने से पहले यह दुआ पढ़ना हमें याद दिलाता है कि यह सफ़ाई सिर्फ़ जिस्म की नहीं, बल्कि ईमान और शुक्र की भी है।
इस लेख में आप Wazu Karne Ki Dua को हिंदी, अरबी और इंग्लिश में जानेंगे, साथ ही इसका अर्थ और इसकी फ़ज़ीलत भी समझेंगे।
वजू करने से पहले पढ़ी जाने वाली दुआ
💧 Wazu Karne Ki Dua in Hindi
बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहिम।
बिस्मिल्लाहि वल्हम्दु लिल्लाहि अला दीनिल इस्लाम।
💧 Wazu Karne Ki Dua in Arabic
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيمِ
بِسْمِ اللّٰهِ وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ عَلَى دِينِ الْإِسْلَامِ
💧 Wazu Karne Ki Dua in English
Bismillah Hir-Rahmaan Nir-Raheem.
Bismillahi Walhamdu Lillahi ‘Ala Deenil Islam.
वजू करने की दुआ का अर्थ
इस दुआ का मतलब है:
“अल्लाह के नाम से शुरुआत करता हूँ, जो बहुत मेहरबान और रहमत वाला है। और सारी तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं, जिसने हमें इस्लाम के दीन पर क़ायम रखा।”
यह दुआ हमें हर वजू के साथ अल्लाह का शुक्र अदा करना सिखाती है।
Wazu Karne Ki Dua की फ़ज़ीलत
Wazu Karne Ki Dua सिर्फ़ एक सेन्टेंस नहीं, बल्कि ईमान और शुक्र का इज़हार है। इसके कई बड़े फ़ायदे बताए गए हैं:
- वजू करने से पहले दुआ पढ़ने से पूरे वजू का सवाब मिलता है
- जब तक वजू बाक़ी रहती है, अज्र मिलता रहता है
- यह दुआ ईमान की मज़बूती का ज़रिया बनती है
- इंसान को यह एहसास दिलाती है कि इस्लाम एक बहुत बड़ी नेमत है
- अल्लाह की रहमत और बरकत वजू में शामिल हो जाती है
वजू शुरू करते समय दुआ क्यों पढ़नी चाहिए?
आज हम अक्सर जल्दबाज़ी में वजू शुरू कर देते हैं, लेकिन Wazu Karne Ki Dua पढ़ने से:
- हर काम अल्लाह के नाम से शुरू होता है
- वजू एक आम काम नहीं बल्कि इबादत बन जाता है
- दिल में शुक्र और विनम्रता पैदा होती है
यही वजह है कि उलमा ने वजू से पहले इस दुआ को पढ़ने की ताकीद की है।
कब पढ़नी चाहिए Wazu Karne Ki Dua?
- वजू शुरू करने से पहले
- पानी लगाने से पहले
- हर बार वजू करते समय
अगर ज़ुबान से न पढ़ पाएं, तो दिल में “बिस्मिल्लाह” कहना भी सवाब है।
आख़िरी नसीहत
मेरे प्यारे मुस्लिम भाइयों और बहनों, Wazu Karne Ki Dua एक छोटी-सी लेकिन बहुत बरकत वाली दुआ है। अगर हम इसे अपनी आदत बना लें, तो हमारा हर वजू अल्लाह की याद और शुक्र के साथ शुरू होगा।
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