Bukhar Ki Dua: बुखार में तुरंत शिफ़ा पाने की इस्लामी दुआ

जब इंसान बीमारी में होता है, तब सबसे पहले उसका दिल अपने रब की तरफ़ पलटता है। इस्लाम हमें सिखाता है कि हर बीमारी अल्लाह की तरफ़ से एक आज़माइश है।

लेकिन उसी के साथ शिफ़ा का वादा भी है। बुखार जैसी तकलीफ़ भले ही बदन को कमज़ोर कर दे, मगर ईमान वालों के लिए यह रहमत, सब्र और गुनाहों की माफ़ी का ज़रिया बन जाती है।

अगर आप या आपके घर में कोई बुखार से परेशान है, तो यह लेख आपके लिए बेहद खास है। यहाँ आपको मिलेगी Bukhar Ki Dua In Hindi, साथ ही वही दुआ अरबी और इंग्लिश में भी दी गई है।


🌙 Bukhar Ki Dua In Hindi

बिस्मिल्लाहील कबीर, अउजुबिल्लाहिल अज़ीम मिन शर्रि कुल्लि अर्किन ना-आरिन व मिन शर्रि हर्रिन्नार


🕌 Bukhar Ki Dua In Arabic

بِسْمِ اللَّهِ الْكَبِيرِ اَعُوْذُ بِاللّٰهِ الْعَظِيْمِ مِنْ شَرِّ كُلِّ عَرْقٍ نَعَّارٍ وَمِنْ شَرِّ حَرِّ النَّار


🌍 Bukhar Ki Dua In English

Bismillaaheel Kabeer Aujoobilaaheel Azeem Min Sharree Qulli Arkeen Naa-Areen Wa Min Sharree Harrinnaar


📖 Bukhar Ki Dua Ka Meaning (Hindi)

मैं महान और ताक़त वाले अल्लाह के नाम से, हर उबलती हुई रग की बुराई से और आग की तपिश की शर से, अज़मत वाले रब की पनाह चाहता हूँ।


🕊️ बुखार को लेकर इस्लामी नज़रिया

इस्लाम में बीमारी को सिर्फ़ तकलीफ़ नहीं माना गया, बल्कि उसे बंदे के लिए एक रहमत और उसे सुधार का ज़रिया भी बताया गया है।

बुखार हो या कोई और बीमारी यह अल्लाह की तरफ़ से आने वाली आज़माइश होती है, जो इंसान को अपने रब के और क़रीब ले जाती है।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि बीमारी मोमिन के गुनाहों को धो देती है। यानी जिस्म को दर्द मिलता है, लेकिन रूह पाक होती चली जाती है।


🌿 बुखार के रूहानी फ़ायदे

  • अल्लाह की तरफ़ से आने वाली हर आज़माइश पर सब्र करना ईमान की पहचान है।
  • कई बार जिस्मानी बीमारियाँ अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खोल देती हैं।
  • बुखार गुनाहों को ऐसे मिटा देता है जैसे भट्ठी लोहे से जंग साफ़ कर देती है।
  • हदीस-ए-मुबारक में आया है कि जो शख़्स बुखार की हालत में इंतिक़ाल करता है, वह शहीद होता है।
  • जब तक इंसान बुखार में रहता है, उसकी हर रग के फड़कने पर उसे नेकियाँ मिलती रहती हैं।
  • अगर किसी को एक रात बुखार रहे, तो वह गुनाहों से ऐसा पाक हो जाता है जैसे आज ही पैदा हुआ हो।
  • बुखार आशिक़-ए-रसूल के गुनाहों को ऐसे झाड़ देता है जैसे पेड़ अपने पत्ते गिरा देता है।

🤲 बुखार की दुआ पढ़ने का सही तरीका

  • दुआ पढ़ने से पहले वुज़ू कर लेना बेहतर है।
  • क़िब्ला रुख़ होकर बैठें या लेटकर भी पढ़ सकते हैं।
  • तीन बार “बिस्मिल्लाह” कहकर दुआ पढ़ें।
  • अल्लाह पर पूरा यक़ीन रखें कि वही शिफ़ा देने वाला है।
  • दुआ के बाद अपने और अपने घर वालों के लिए शिफ़ा माँगें।

याद रखें, दुआ तभी असर करती है जब दिल में यक़ीन हो और ज़ुबान में सच्चाई।


✨ अंतिम बातें

अब आप बुखार की दुआ, उसका मतलब और इस्लाम में उसकी अहमियत सब कुछ जान चुके हैं। जब भी बुखार आए, घबराने के बजाय सब्र के साथ इस दुआ को पढ़िए और अल्लाह से शिफ़ा की उम्मीद रखिए।

यह लेख हमने आम लोगों के लिए आसान भाषा में तैयार किया था, ताकि हर कोई इसे पढ़कर समझ सके और अमल में ला सके। अगर आपको किसी हिस्से में दिक्कत हो या कोई सवाल मन में आए, तो कमेंट करके ज़रूर पूछिए।

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