Safar Ki Dua – सफ़र से पहले की मुकम्मल दुआ और तरीका

जब भी इंसान सफ़र पर निकलता है, उसके दिल में हल्की सी फ़िक्र जरूर होती है रास्ता कैसा होगा, मंज़िल तक ख़ैरियत से पहुंचेंगे या नहीं।

ऐसे वक़्त में मोमिन का सबसे बड़ा सहारा बनती है सफ़र की दुआ। यह दुआ अल्लाह की पनाह, रहमत और हिफ़ाज़त का वसीला है, जिसे पढ़कर सफ़र शुरू करने से दिल को सुकून और रास्ते को बरकत मिलती है।

अगर आप Safar Ki Dua In Hindi, सफ़र की दुआ, या यात्रा से पहले पढ़ने की दुआ खोज रहे हैं, तो यहां आपको सब कुछ एक ही जगह मिल जाएगा।


Safar Ki Dua In Hindi

सुब्हानल्लज़ी सख़्ख़रालना हाज़ा वमा कुन्ना लहु मुक़रिनीन व इन्ना इला रब्बिना लमुनक़लिबून


Safar Ki Dua In Arabic

سُبْحَانَ الَّذِي سَخَّرَ لَنَا هَـٰذَا وَمَا كُنَّا لَهُ مُقْرِنِينَ وَإِنَّا إِلَىٰ رَبِّنَا لَمُنقَلِبُونَ


Safar Ki Dua In English

Subhanallazi Sakhkharalana Haaza Wa Maa Kunna Lahu Muqrineen Wa Inna Ila Rabbina Lamunqaliboon


सफ़र की दुआ का मतलब

पाक और बुलंद है वह अल्लाह जिसने इस सवारी को हमारे क़ाबू में कर दिया,
वरना हम इसे क़ाबू में करने वाले नहीं थे।
और यक़ीनन हमें अपने रब की ही तरफ़ लौटकर जाना है।

यह दुआ हमें याद दिलाती है कि सफ़र हो या ज़िंदगी हर कदम अल्लाह के हाथ में है।


सफ़र की सुन्नत और आदाब

इस्लाम ने सफ़र को भी अदब और उसूल के साथ करने की तालीम दी है। कुछ अहम बातें याद रखें:

  • ज़रूरत के मुताबिक किसी भी दिन सफ़र किया जा सकता है।
  • अगर जल्दी न हो तो गुरुवार को सफ़र शुरू करना बेहतर माना गया है।
  • सफ़र का सबसे अच्छा वक़्त सुबह है, क्योंकि सुबह निकलना रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत है।
  • अकेले सफ़र करने से बचें, इससे परेशानी बढ़ सकती है।
  • नबी करीम ﷺ ने तन्हा सफ़र से मना फरमाया है।
  • अगर दो या उससे ज़्यादा लोग हों, तो किसी एक को लीडर बना लें, ताकि बिना मशवरे के कोई इधर-उधर न जाए।
  • हमारी मां-बहनें कभी भी अकेले सफ़र न करें। औरत को हमेशा किसी महरम के साथ सफ़र करना चाहिए।
  • चाहे सफ़र शहर के अंदर ही क्यों न हो या आधे दिन का हो, एहतियात ज़रूरी है।
  • हदीस शरीफ़ के मुताबिक रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
    अल्लाह और क़यामत पर ईमान रखने वाली औरत के लिए महरम के बग़ैर सफ़र जायज़ नहीं।
  • अगर वक़्त मकरूह न हो, तो लिबासे सफ़र पहनकर घर से निकलने से पहले 4 रकात नफ़्ल पढ़ लेना बहुत बेहतर है।

आख़िरी बात

अब आप आसानी से सफ़र की दुआ पढ़ और समझ चुके हैं। इसे याद कर लें और हर बार सफ़र से पहले ज़रूर पढ़ें, ताकि आपका हर सफ़र अल्लाह की हिफ़ाज़त और रहमत में पूरा हो।

इस लेख में हमने दुआ के साथ-साथ सफ़र से जुड़ी ज़रूरी बातें भी आसान लफ्ज़ों में समझाईं, ताकि आप सही तरीके से अमल कर सकें।

अगर आपके दिल में अभी भी कोई सवाल या कंफ्यूजन हो, तो बेझिझक पूछें। और इस पोस्ट को उन लोगों तक ज़रूर शेयर करें, जो अक्सर सफ़र करते हैं ताकि हर मुसाफ़िर अल्लाह की पनाह में रहे।