जब भी हम नया कपड़ा पहनते हैं, दिल खुश हो जाता है। त्योहार हो, शादी-ब्याह हो या कोई खास मौका नया लिबास हमारी शख्सियत में निखार ला देता है।
लेकिन एक मोमिन के लिए नया कपड़ा सिर्फ़ सजने का जरिया नहीं, बल्कि अल्लाह की दी हुई एक बड़ी नेमत है। इस पर शुक्र करना सुन्नत है, और उसी शुक्र का तरीका है नया कपड़ा पहनने की दुआ पढ़ना।
आज आप यहाँ Naya Kapda Pahnane Ki Dua हिंदी, अरबी और इंग्लिश तीनों में जानेंगे। यह लेख इस तरह तैयार किया गया है कि आप इसे आसानी से पढ़ सकें, समझ सकें।
और हर बार कपड़ा पहनते वक्त इस दुआ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना सकें। याद रखिए, जो इंसान अल्लाह की दी हुई हर नेमत पर शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसकी नेमतों में और इज़ाफ़ा फरमा देता है।
Naya Kapda Pahnane Ki Dua In Hindi
अलहम्दु लिल्लाहिल लज़ी कसानी मा ऊवारी बिही औरती व अतजम्मलु बिही फी हयाती
Naya Kapda Pahnane Ki Dua In Arabic
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي كَسَانِي مَا أُوَارِي بِهِ عَوْرَتِي وَأَتَجَمَّلُ بِهِ فِي حَيَاتِي
Naya Kapda Pahnane Ki Dua In English
Alhamdu Lillahil Lazi Kasaani Maa Uwaari Bihee Aurati Wa Ata Jammalu Bihee Fi Hayaati
Dua Ka Tarjuma (Meaning in Hindi)
“सब तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने मुझे ऐसा कपड़ा पहनाया, जिससे मैं अपनी शर्मगाह को ढकता हूँ और अपनी ज़िंदगी में इससे खूबसूरती हासिल करता हूँ।”
यह दुआ हमें सिखाती है कि हमारा पहनावा, हमारी इज़्ज़त और हमारी खूबसूरती सब कुछ अल्लाह की देन है। जब हम नया कपड़ा पहनते ही यह दुआ पढ़ते हैं, तो हमारे दिल में शुक्र, और अल्लाह से जुड़ाव पैदा होता है।
नया कपड़ा पहनने की अहमियत इस्लाम में
इस्लाम हमें सिखाता है कि हर नेमत पर अल्लाह का शुक्र अदा किया जाए चाहे वह खाना हो, पानी हो या पहनने का कपड़ा। कपड़ा इंसान की इज़्ज़त और पर्दे का जरिया है।
इसी वजह से नबी करीम ﷺ ने हमें नया कपड़ा पहनते वक्त दुआ पढ़ने की तालीम दी, ताकि हमारा हर छोटा काम भी इबादत बन जाए। नया कपड़ा पहनते समय यह दुआ पढ़ने से:
- अल्लाह का शुक्र अदा होता है
- दिल में आज़िज़ी पैदा होती है
- नेमत में बरकत आती है
- इंसान घमंड से बचता है
नए कपड़े पहनने का सुन्नत तरीका
नया कपड़ा पहनते वक्त अगर हम सुन्नत पर अमल करें, तो सवाब और बढ़ जाता है:
- कपड़ा हमेशा दाईं तरफ़ से पहनना चाहिए, यह नबी करीम ﷺ की सुन्नत है।
- हुज़ूर ﷺ जब क़मीज़ या कुर्ता पहनते थे तो पहले दाहिना हाथ डालते थे।
- शलवार या पायजामा पहनते समय पहले दाहिना पैर डालते थे।
- उतारते वक्त बाईं तरफ़ से उतारना बेहतर है।
- कपड़ा पहनने से पहले उसे झाड़ लेना भी सुन्नत है।
- शलवार, पैंट या लुंगी को टखनों से ऊपर रखना यही तरीका नबी करीम ﷺ का था।
इन आदाब पर अमल करने से हमारा रोज़मर्रा का काम भी इबादत बन जाता है।
अंतिम लफ्ज़
मेरे प्यारे मोमिनों, अब जब भी आप नया कपड़ा पहनें, सिर्फ़ आईने में खुद को न देखें, बल्कि अल्लाह की रहमत को भी महसूस करें।
इस छोटी सी दुआ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना लें। यकीन मानिए, यह आदत आपकी ज़िंदगी में सुकून, बरकत और अल्लाह की क़रीबी पैदा करेगी।
हमने यहाँ नए कपड़े पहनने की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में आसान लफ्ज़ों में पेश की थी, ताकि हर उम्र का इंसान इसे पढ़ सके और याद कर सके।
अगर यह लेख आपको अच्छा लगा हो और इससे आपको कुछ फायदा मिला हो, तो इसे दूसरों तक ज़रूर पहुँचाएँ ताकि और लोग भी इस सुन्नत पर अमल कर के सवाब कमा सकें।