जब भी इंसान अपने घर से बाहर निकलता है, तो वह एक नई दुनिया में कदम रखता है जहां रास्ते हैं, लोग हैं, काम हैं और साथ ही अनजानी परेशानियां भी।
ऐसे में इस्लाम हमें एक छोटी-सी मगर बेहद ताक़तवर दुआ सिखाता है, जो हर मोमिन को अल्लाह की पनाह में ले आती है। आज यहां आप Ghar Se Nikalne Ki Dua हिंदी, अरबी और इंग्लिश में जानेंगे।
ताकि आप इसे आसानी से याद कर सकें और हर बार घर से निकलते वक्त पढ़ सकें। यह दुआ इतनी सरल है कि बच्चा भी याद कर सकता है और इतनी असरदार है कि पूरे दिन की हिफ़ाज़त का ज़रिया बन जाती है।
एक बार इसे अपने ज़ेहन में बसा लें, फिर आपको कहीं और ढूंढने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। बस दरवाज़ा खोलते वक्त यह दुआ पढ़िए और अल्लाह पर भरोसा करके बाहर कदम रखिए।
🌸 Ghar Se Nikalne Ki Dua In Hindi
बिस्मिल्लाही तवक्कलतु अलल्लाही व ला हौ ल वला कुव्वता इला बिल्लाह
📖 Ghar Se Nikalne Ki Dua In Arabic
بِسْمِ اللّٰہِ تَوَکَّلْتُ عَلَی اللّٰہِ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّۃَ إِلَّا بِاللّٰہِ
🌍 Ghar Se Nikalne Ki Dua In English
Bismillahi Tawakkaltu ‘Alallahi Wa Laa Hawla Wa Laa Quwwata Illa Billah
📝 दुआ का अर्थ (Tarjuma)
“मैं अल्लाह के नाम से निकलता हूँ, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया। गुनाहों से बचने और नेक काम करने की ताक़त सिर्फ़ अल्लाह की तरफ़ से है।”
यह दुआ हमें याद दिलाती है कि हमारा सहारा, हमारी ताक़त और हमारी हिफ़ाज़त सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है।
✨ घर से निकलने की दुआ की फ़ज़ीलत
- जब कोई मोमिन घर से बाहर निकलते वक्त यह दुआ पढ़ता है, तो वह घर लौटने तक हर बला और आफ़त से महफूज़ रहता है।
- हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया कि जब इंसान घर से निकलता है, तो उसके साथ दो फ़रिश्ते मुक़र्रर हो जाते हैं।
- जब वह “बिस्मिल्लाही” कहता है, तो फ़रिश्ते कहते हैं: तू सीधी राह पर चल पड़ा।
- “व ला हौ ल वला कुव्वता इला बिल्लाह” कहने पर फ़रिश्ते कहते हैं: अब तू हर मुसीबत से सुरक्षित है।
- “तवक्कलतु अलल्लाही” कहने पर फ़रिश्ते कहते हैं: अब तुझे किसी और की मदद की ज़रूरत नहीं।
- जो शैतान उस इंसान को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, फ़रिश्ते उनसे कहते हैं: अब तुम इसका क्या बिगाड़ोगे? यह तो अल्लाह की पनाह में आ चुका है।
यानी यह छोटी-सी दुआ पूरे दिन की ढाल बन जाती है—दुर्घटना, बीमारी, बुरी नज़र और हर अनचाही परेशानी से बचाव का ज़रिया।
🕌 घर से निकलने का सुन्नत तरीका
- घर से निकलते वक्त अपने माँ-बाप और घर वालों को सलाम करें।
- हुज़ूर ﷺ का फ़रमान है: घर से बाहर सलाम करके जाओ।
- एक-दूसरे को माफ़ करके घर से रुख़्सत हों, जैसे आप अपनी मग़फ़िरत चाहते हैं।
- घर से बाहर कदम रखते समय पहले बायां पाँव बाहर रखें।
- बाहर निकलकर हर क़दम संभलकर रखें और इत्मिनान से चलें।
जब इन सुन्नत तरीकों के साथ यह दुआ जुड़ जाती है, तो आपका हर क़दम इबादत बन जाता है।
अंतिम लफ़्ज़
मेरे प्यारे मोमिनों, अब आप घर से निकलने की दुआ को पढ़ना, समझना और याद करना सीख चुके हैं। यह दुआ न सिर्फ़ ज़ुबान पर आसान है, बल्कि दिल को सुकून और ज़िंदगी को हिफ़ाज़त देती है।
आज ही से यह आदत बना लें कि जैसे ही आप दरवाज़े की तरफ़ बढ़ें, यह दुआ पढ़ें। इंशाअल्लाह, आपका हर दिन अल्लाह की पनाह में शुरू होगा और ख़ैर व बरकत के साथ गुज़रेगा।
अगर इस लेख से आपको फायदा मिला हो, तो इसे दूसरों तक ज़रूर पहुंचाएं, ताकि हर मुसलमान अल्लाह की हिफ़ाज़त में अपना सफ़र शुरू कर सके।