ज़िंदगी में कभी-कभी इंसान इतना मजबूर हो जाता है कि न कोई रास्ता समझ आता है, न कोई सहारा नज़र आता है। हर कोशिश के बाद भी जब दिल भारी हो जाए।
और आँखें अनजाने में ऊपर उठ जाएँ वहीं से सलातुल हाजत की शुरुआत होती है। Salatul Hajat Ki Dua सिर्फ एक दुआ नहीं, बल्कि टूटे हुए दिल की वह सदा है जो सीधे अल्लाह की रहमत तक पहुँचती है।
जब दुनिया के दरवाज़े बंद हो जाएँ, तब यह दुआ बंद दरवाज़ों को खोलने वाली बनती है। इस लेख में आप सलातुल हाजत की दुआ हिंदी, अरबी और इंग्लिश में जानेंगे।
साथ ही इसका मतलब, पढ़ने का सही सुन्नत तरीका और वह यकीन जो इस दुआ को असरदार बनाता है — ताकि आपकी दुआ सिर्फ पढ़ी न जाए, बल्कि कुबूलियत के करीब पहुँचे।
🤲 Salatul Hajat Ki Dua In Hindi
ला इला ह इल्लल्लाहुल हलीमुल करीम।
सुब्हानल्लाहि रब्बिल अर्शिल अज़ीम।
वल हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन।
अस्अलुका मुजिबाती रहमतिका,
व अज़ाइम मग़फिरतिका,
वल ग़नीमत मिन कुल्ली बिर्र,
वस्सलामत मिन कुल्ली इस्म।
ला तदअ ली ज़म्बन इल्ला ग़फ़रतहू,
व ला हम्मन इल्ला फ़र्रजतहू,
व ला हाजतन हिया लक रिद़न
इल्ला क़ज़ैतहा,
या अरहमर्राहिमीन।
🕋 Salatul Hajat Ki Dua In Arabic
لا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ الْحَلِيمُ الْكَرِيمُ،
سُبْحَانَ اللَّهِ رَبِّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ،
وَالْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ،
أَسْأَلُكَ مُوجِبَاتِ رَحْمَتِكَ،
وَعَزَائِمَ مَغْفِرَتِكَ،
وَالْغَنِيمَةَ مِنْ كُلِّ بِرٍّ،
وَالسَّلَامَةَ مِنْ كُلِّ إِثْمٍ،
لَا تَدَعْ لِي ذَنْبًا إِلَّا غَفَرْتَهُ،
وَلَا هَمًّا إِلَّا فَرَّجْتَهُ،
وَلَا حَاجَةً هِيَ لَكَ رِضًا
إِلَّا قَضَيْتَهَا،
يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ۔
🌍 Salatul Hajat Ki Dua In English (Transliteration)
La ilaha illallahu Al-Halimul Kareem.
Subhanallahi Rabbil Arshil Azeem.
Wal hamdu lillahi Rabbil Aalameen.
As’aluka mujibaati rahmatika,
Wa azaa’ima maghfiratika,
Wal ghaneemata min kulli birr,
Was-salaamata min kulli ithm.
La tada’ li zamban illa ghafartahu,
Wa la hamman illa farrajtahu,
Wa la haajatan hiya laka ridan
Illa qadaytaha,
Ya Arhamar-Rahimeen.
📖 Salatul Hajat Ki Dua Ka Tarjuma (अर्थ)
अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, जो बहुत सब्र करने वाला और बेहद करम करने वाला है।
वह अल्लाह पाक है जो अर्शे अज़ीम का मालिक है।
तमाम तारीफें अल्लाह ही के लिए हैं, जो सारे जहानों का पालनहार है।
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरी रहमत के ज़रिये,
तेरी मुकम्मल मग़फिरत के सहारे,
हर नेकी में हिस्सा और हर गुनाह से हिफ़ाज़त मांगता हूँ।
ऐ अल्लाह! मेरा कोई गुनाह बाकी न रहे जिसे तू माफ़ न करे,
कोई ग़म न बचे जिसे तू दूर न करे,
और मेरी हर वह हाजत जो तुझे पसंद हो पूरी फरमा दे।
ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले!
🕌 सलातुल हाजत की दुआ पढ़ने का सही तरीका
सलातुल हाजत की दुआ पढ़ते वक्त तरीका बहुत अहम होता है:
- पहले दो या चार रकात नफ़्ल नमाज़ अदा करें
- नमाज़ के बाद क़िब्ला रुख बैठ जाएँ
- तीन बार दुरूद शरीफ़ पढ़ें
- अब पूरे यकीन और तवक्कुल के साथ सलातुल हाजत की दुआ पढ़ें
- इसके बाद अपनी जायज़ ज़रूरत अल्लाह के सामने रखें
- दुनिया और आख़िरत की भलाई की दुआ करें
- आखिर में फिर तीन बार दुरूद शरीफ़ पढ़कर हाथों पर फेर लें
दिल रो पड़े तो रुकिए मत यही दुआ की कबूलियत की निशानी होती है।
🌟 सलातुल हाजत की दुआ की खास फज़ीलत
- परेशानियों में सुकून मिलता है
- दिल को तसल्ली और इत्मीनान आता है
- जायज़ हाजतें पूरी होने का सबब बनती है
- अल्लाह से रिश्ता और मजबूत होता है
- गुनाहों की माफी की उम्मीद पैदा होती है
🤍 अंतिम बात
मेरे प्यारे मोमिनों, याद रखिए अल्लाह देर करता है, मगर इंकार नहीं। सलातुल हाजत वह अमानत है जो अल्लाह ने हमें तब के लिए दी है जब हमारी उम्मीदें थक जाएँ।
इस दुआ को पढ़ते वक्त अल्फ़ाज़ से ज़्यादा दिल का झुकना ज़रूरी है। आँखों से निकला एक आँसू, सैकड़ों अल्फ़ाज़ से ज़्यादा वज़न रखता है।
अगर आज आप किसी परेशानी, तंगी, बीमारी या उलझन में हैं तो यह दुआ अपने सजदे में शामिल कर लीजिए। अल्लाह आपकी खामोश दुआओं को भी सुनता है।