Humbistari Ki Dua: दुआ, सुन्नत तरीका और हदीस के साथ पूरी जानकारी

इस्लाम एक मुकम्मल दीन है, जो इंसान की ज़िंदगी के हर पहलू में रहनुमाई करता है चाहे वह इबादत हो, कारोबार हो या फिर शौहर-बीवी का पाक रिश्ता।

निकाह के बाद पति-पत्नी के बीच हमबिस्तरी भी इबादत बन जाती है, बशर्ते वह सुन्नत के तरीके से हो और अल्लाह को याद करते हुए की जाए।

आज यहाँ Humbistari Ki Dua हिंदी के साथ उसकी अरबी और इंग्लिश लिपि में पूरी जानकारी पाएँगे। यह दुआ न सिर्फ़ रिश्ते में बरकत लाती है, बल्कि आने वाली औलाद को भी शैतान के असर से महफूज़ रखती है।


Humbistari Ki Dua In Hindi

बिस्मिल्लाहि अल्लाहुम्मा जन्निबनश् शैताना व जन्निबिश् शैताना मा रज़कतना


Humbistari Ki Dua In Arabic

بِسْمِاللّٰهِ اَللّٰهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ وَجَنِّبِ الشَّيْطٰانَ مَا رَزَقْتَنَا


Humbistari Ki Dua In English

Bismillahi Allahumma Jannibanash Shaitana Wa Jannibish Shaitana Maa Razaktanaa


दुआ का हिंदी अर्थ (Tarjuma)

अल्लाह के नाम से। ऐ अल्लाह! हमसे शैतान को दूर रख और उस औलाद से भी शैतान को दूर रख जो तू हमें अता फरमाए।

यही वह दुआ है जो सोहबत को पाक बनाती है और आने वाली नस्ल के लिए रहमत का दरवाज़ा खोलती है।


हमबिस्तरी से पहले सुन्नत और आदाब

हमबिस्तरी सिर्फ़ एक शारीरिक अमल नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और पाक रिश्ता है। इसलिए इस्लाम ने इसके कुछ आदाब बताए हैं:

  • बेहतर है कि सोहबत से पहले बा-वुज़ू हो लें।
  • मुबाशरत शुरू करने से पहले हमबिस्तरी की दुआ ज़रूर पढ़ें।
  • इस बात का ख्याल रखें कि क़िब्ला की तरफ़ रुख न हो।
  • खड़े-खड़े या बैठे-बैठे सोहबत न करें, यह अदब के खिलाफ़ है।
  • शौहर और बीवी दोनों अदब व एहतराम के साथ एक-दूसरे के करीब आएँ।
  • इंजाल यानि मनी निकलने के बाद तुरंत अलग न हों।
  • सोहबत के बाद अपने-अपने मकाम को साफ़ कर लें।
  • इसके बाद पेशाब करना फायदेमंद माना गया है।

ये तमाम बातें सुन्नत के मुताबिक़ एक मुकम्मल और सही तरीका सिखाती हैं।


हमबिस्तरी की दुआ पर हदीस

हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रज़ियल्लाहु तआला अन्हुमा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:

“जब कोई शख्स हमबिस्तरी के वक्त यह दुआ पढ़ता है और फिर अगर अल्लाह उसे औलाद अता फरमाता है, तो उस औलाद को शैतान कभी नुक़सान नहीं पहुँचा सकता।”

इमाम अहमद रज़ा ख़ान रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि:

“अगर कोई शख्स सोहबत के वक्त दुआ न पढ़े और शैतान से अल्लाह की पनाह न मांगे, तो शैतान उसकी शर्मगाह से लिपट जाता है। यहाँ तक कि जो औलाद पैदा होती है, उसमें नाफरमानी और बुरी खसलतें पैदा हो जाती हैं।”

यही वजह है कि इस दुआ को मामूली न समझा जाए। यह दुआ नस्लों की हिफाज़त का ज़रिया है।


क्यों ज़रूरी है Humbistari Ki Dua पढ़ना?

  • यह रिश्ते में बरकत और पाकीज़गी लाती है।
  • शैतान की दख़लअंदाज़ी से हिफाज़त करती है।
  • औलाद को बुरे असर से बचाती है।
  • सोहबत को इबादत का दर्जा देती है।
  • शौहर-बीवी के रिश्ते में सुकून और रहमत बढ़ाती है।

अंतिम बात

मेरे प्यारे मोमिनों, अब आप पूरी तरह जान चुके हैं कि Humbistari Ki Dua कितनी अहम और फायदेमंद है। यह सिर्फ़ अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि आने वाली नस्लों की हिफाज़त की चाबी है।

अगर यह लेख आपके दिल को छू गया हो और आपको कुछ नई इल्म मिली हो, तो इसे दूसरों तक भी पहुँचाइए, ताकि और लोग भी इस रहमत भरी सुन्नत से वाक़िफ़ हो सकें।