Isha Ki Namaz Ki Rakat | ईशा की नमाज़ की रकात

ईशा की नमाज़ दिन की आख़िरी नमाज़ होती है एक ऐसी इबादत जिसमें मोमिन अपने रब से सुकून, रहमत और मग़फिरत की दुआ मांगता है।

कई लोग यह जानना चाहते हैं कि Isha Ki Namaz Ki Rakat कितनी होती है या ईशा की नमाज़ में कितनी सुन्नत, फर्ज़, नफ्ल और वित्र वाजिब नमाज़ें पढ़ी जाती हैं।

अगर आप भी यही जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। यहां आपको ईशा की नमाज़ की पूरी जानकारी आसान और इस्लामी अंदाज़ में मिलेगी। तो चलिए, इल्म और ईमान दोनों को बढ़ाते हैं।


Isha Ki Namaz Ki Rakat

ईशा की नमाज़ में कुल 17 रकातें होती हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • 4 रकात सुन्नत (ग़ैर मुअक्कदा)
  • 4 रकात फर्ज़
  • 2 रकात सुन्नत (मुअक्कदा)
  • 2 रकात नफ्ल
  • 3 रकात वित्र वाजिब
  • 2 रकात नफ्ल

यानी पूरी ईशा की नमाज़ 17 रकातों में मुकम्मल होती है।


ईशा की नमाज़ की पूरी रकातें टेबल फॉर्म में

नमाज़ का नामईशा की नमाज़
कुल रकातें 17 रकात
सुन्नत की रकातें4 + 2 = 6 रकात
फर्ज़ की रकातें4 रकात
नफ्ल की रकातें2 + 2 = 4 रकात
वित्र वाजिब की रकातें3 रकात

अब जानते हैं कि इन रकातों को कब और किस क्रम में पढ़ना चाहिए।


ईशा की नमाज़ में कितनी सुन्नतें हैं?

ईशा की नमाज़ में कुल 6 रकात सुन्नतें होती हैं।

  1. नमाज़ के वक्त में सबसे पहले 4 रकात सुन्नत अदा करें।
  2. फिर 4 रकात फर्ज़ नमाज़ अदा करें।
  3. उसके बाद 2 रकात सुन्नत मुअक्कदा पढ़ें।

सुन्नत नमाज़ें नबी की प्यारी आदत हैं, इन्हें पढ़ने से बहुत सवाब मिलता है और नमाज़ मुकम्मल होती है।


ईशा की नमाज़ में कितनी फर्ज़ हैं?

ईशा की नमाज़ में 4 रकात फर्ज़ होती हैं।

  • अगर आप मर्द हैं, तो इन्हें जमाअत के साथ, यानी इमाम के पीछे अदा करना बेहतर है।
  • अगर किसी वजह से अकेले पढ़ें तो भी नमाज़ सही है।
  • औरतों के लिए मस्जिद जाना जरूरी नहीं, वे घर पर ही 4 रकात फर्ज़ अदा करें और उसके बाद 2 रकात सुन्नत पढ़ें।

ईशा की नमाज़ में कितनी नफ्ल हैं?

ईशा की नमाज़ में कुल 4 रकात नफ्ल होती हैं।

  • फर्ज़ और सुन्नत के बाद 2 रकात नफ्ल अदा करें।
  • फिर जब आप 3 रकात वित्र वाजिब पढ़ लें, उसके बाद आखिरी 2 रकात नफ्ल अदा करें।

नफ्ल नमाज़ें पढ़ने से इंसान के आमाल-ए-नामे में सवाब बढ़ता है और रूहानी सुकून हासिल होता है।


ईशा की नमाज़ में कितनी वित्र हैं?

ईशा की नमाज़ में 3 रकात वित्र वाजिब होती हैं।

  • वित्र की नमाज़ को आप फर्ज़ और सुन्नत के बाद अदा करें।
  • रमज़ान में इसे जमाअत के साथ पढ़ा जाता है।
  • आम दिनों में इसे अकेले अदा किया जाता है।

वित्र वाजिब नमाज़ बहुत अहम है। इसे कभी न छोड़ें क्योंकि यह नमाज़ रात के आखिर हिस्से की सबसे अफ़ज़ल इबादत है।


ईशा की नमाज़ को पूरी तरह कैसे पढ़ें?

ईशा की नमाज़ की पूरी तरतीब इस तरह रखें:

  1. 4 रकात सुन्नत
  2. 4 रकात फर्ज़
  3. 2 रकात सुन्नत
  4. 2 रकात नफ्ल
  5. 3 रकात वित्र वाजिब
  6. 2 रकात नफ्ल

इस तरह आपकी ईशा की 17 रकात नमाज़ मुकम्मल हो जाती है।


ईशा की नमाज़ का सही समय

ईशा की नमाज़ का वक्त मग़रिब की नमाज़ के बाद से लेकर आधी रात तक रहता है।

हालांकि, अगर किसी वजह से देर हो जाए तो फज्र से पहले तक भी पढ़ी जा सकती है।

लेकिन बेहतर यह है कि इसे आधी रात से पहले अदा किया जाए, ताकि सुन्नत के मुताबिक हो।


ईशा की नमाज़ की फज़ीलत

नबी-ए-पाक ने फरमाया:

जिसने ईशा की नमाज़ जमाअत से अदा की, उसने आधी रात की इबादत की। और जिसने फज्र की नमाज़ जमाअत से अदा की, उसने पूरी रात की इबादत की।
(सहीह मुस्लिम)

यानी ईशा की नमाज़ पढ़ना सिर्फ फर्ज़ अदा करना नहीं बल्कि रातभर की इबादत का सवाब पाने का ज़रिया है।


अंतिम लफ़्ज़

अब आप जान गए कि Isha Ki Namaz Ki Rakat कितनी है और इसे किस क्रम में पढ़ना चाहिए। अगर आप इस तरतीब से नमाज़ अदा करेंगे, तो आपकी इबादत मुकम्मल और सुन्नत के मुताबिक़ होगी।

अगर इस लेख में कुछ सुधार सुझाना चाहें या कोई सवाल हो तो नीचे कमेंट करें। आपकी राय हमारे लिए बहुत कीमती होगी इंशाअल्लाह, आपको इसका अज्र ज़रूर मिलेगा।