Taraweeh Ki Dua: रमज़ान की सबसे अहम दुआ, अर्थ और पढ़ने का तरीका

रमज़ान का महीना रहमत, मग़फ़िरत और जहन्नम से निजात का पैग़ाम लेकर आता है। इस पाक महीने की सबसे ख़ास इबादतों में से एक है नमाज़-ए-तरावीह।

तरावीह सिर्फ़ नमाज़ ही नहीं, बल्कि दिल की सफ़ाई, रूह की ताज़गी और अल्लाह से क़रीबी का बेहतरीन ज़रिया है। तरावीह की नमाज़ में हर चार रकात के बाद जो दुआ पढ़ी जाती है

उसे ही Taraweeh Ki Dua कहा जाता है। यह दुआ अल्लाह की बड़ाई, उसकी क़ुदरत का इज़हार और जहन्नम से पनाह की सच्ची फरियाद है।

आज आप यहाँ Taraweeh Ki Dua In Hindi, अरबी और इंग्लिश में जानेंगे, साथ ही इसका मतलब, पढ़ने का सही तरीका और इसकी अहमियत भी समझेंगे।

हमने इसे बेहद आसान और साफ़ अंदाज़ में पेश किया है, ताकि हर मुसलमान इसे याद कर सके और पूरे रमज़ान अमल में ला सके।


Taraweeh Ki Dua In Hindi

सुब्हा नज़ील मुल्कि वल मलकूत।
सुब्हा नज़ील इज्ज़ति वल अज़मत वल हैबत वल क़ुदरति वल किब्रिया-ए वल जबरूत।
सुब्हानल मलिकिल हय्यिल लज़ी ला यनामु व ला यमूतु।
सुब्बूहुन कुद्दूसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइक़ति वरूह।
अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन्नार।
या मुजीरू, या मुजीरू, या मुजीरू, बिरहमतिका या अरहमर्राहिमीन।


Taraweeh Ki Dua In Arabic

سُبْحَانَ ذِي الْمُلْكِ وَالْمَلَكُوتِ.
سُبْحَانَ ذِي الْعِزَّةِ وَالْعَظَمَةِ وَالْهَيْبَةِ وَالْقُدْرَةِ وَالْكِبْرِيَاءِ وَالْجَبَرُوتِ.
سُبْحَانَ الْمَلِكِ الْحَيِّ الَّذِي لَا يَنَامُ وَلَا يَمُوتُ.
سُبُّوحٌ قُدُّوسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ.
اللَّهُمَّ أَجِرْنَا مِنَ النَّارِ.
يَا مُجِيرُ يَا مُجِيرُ يَا مُجِيرُ بِرَحْمَتِكَ يَا أَرْحَمَ الرَّاحِمِينَ.


Taraweeh Ki Dua In English

Subhaa-na Zil Mulki Wal Malakoot.
Subhaa-na Zil Izzati Wal Azmati Wal Haybati Wal Qudrati Wal Kibriyaa-i Wal Jabrut.
Subhanal Malikil Hayyil Lazi Laa Yanaamu Wa Laa Yamoot.
Subbuhoon Quddoosoon Rabbuna Wa Rabbul Malaikati War-Rooh.
Allahumma Ajirna Minan-Naar.
Yaa Mujiru, Yaa Mujiru, Yaa Mujiru, Bi Rahmatika Yaa Arhamar-Raahimeen.


तरावीह की दुआ का मतलब (तरजुमा)

वह अल्लाह पाक है जो बादशाही और मलकूत का मालिक है।
वह पाक है जो इज्ज़त, अज़मत, हैबत और क़ुदरत वाला है।
वह पाक है जो ज़िंदा बादशाह है—न उसे नींद आती है और न वह मरता है।
वह बिल्कुल पाक और मुक़द्दस है, फरिश्तों और रूह का रब है।
ऐ अल्लाह! हमें जहन्नम की आग से बचा ले।
ऐ बचाने वाले! ऐ बचाने वाले! ऐ बचाने वाले!
अपनी रहमत से हमें बचा ले, ऐ सबसे ज़्यादा रहम करने वाले।


तरावीह की दुआ पढ़ने का सही तरीका

  • तरावीह की नमाज़ दो-दो रकात करके अदा की जाती है।
  • जब चार रकात मुकम्मल हो जाएँ, तो बैठकर यह दुआ पढ़ी जाती है।
  • पूरी तरावीह 20 रकात होती है, इसलिए यह दुआ कुल 5 बार पढ़ी जाती है।
  • यानी हर चार रकात के बाद बैठकर एक बार यह दुआ पढ़ें।
  • दुआ को इत्मिनान, अदब और तवज्जो के साथ पढ़ें, ताकि दिल भी इसमें शामिल हो।

यही तरीका सहाबा और बुज़ुर्गों से चला आ रहा है, जिससे तरावीह की नमाज़ और भी ज़्यादा रूहानी बन जाती है।


तरावीह की दुआ की फ़ज़ीलत

  • यह दुआ अल्लाह की बड़ाई और उसकी क़ुदरत को याद दिलाती है।
  • इसमें जहन्नम से पनाह की दुआ है, जो हर मोमिन की सबसे बड़ी चाहत है।
  • तरावीह की रातों में यह दुआ पढ़ना दिल को सुकून देता है।
  • रमज़ान की बरकतों के साथ यह दुआ मग़फ़िरत का ज़रिया बनती है।
  • जो शख़्स दिल से इसे पढ़ता है, अल्लाह उसकी दुआ क़ुबूल फ़रमाता है।

अंतिम लफ्ज़

मेरे प्यारे मोमिनों, अब आप तरावीह की दुआ, उसका मतलब, पढ़ने का सही तरीका और उसकी फ़ज़ीलत इन सब को अच्छे से जान चुके हैं।

रमज़ान की हर रात जब आप तरावीह के लिए खड़े हों, तो इस दुआ को दिल से पढ़ें और अल्लाह से जहन्नम से निजात और जन्नत की कामयाबी माँगें।

हमने यहाँ हर बात को आसान और साफ़ लफ्ज़ों में पेश किया है, ताकि हर मुसलमान भाई-बहन इस पर अमल कर सके। अगर इसे पढ़ने के बाद भी आपके मन में कोई सवाल या डाउट हो, तो कॉमेंट में ज़रूर पूछें।